- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर मुख्यमंत्री की सख्त समीक्षा, कहा - “काम में रुकावट नहीं चलेगी”; अधिकारियों को 24×7 सक्रिय रहने के दिए निर्देश
- महाकाल मंदिर में अलसुबह गूंजी घंटियां, वीरभद्र के कान में स्वस्तिवाचन के बाद खुले पट; भस्म अर्पण के बाद शेषनाग रजत मुकुट में सजे बाबा
- शादी से मना करने पर घर में घुसा युवक, युवती पर किया हमला; 48 घंटे में गिरफ्तार
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
Ujjain: 14 नवंबर को होगा हरिहर मिलन, राजसी ठाट-बाट के साथ श्रीहरि विष्णु से मिलने गोपाल मंदिर पहुंचेंगे शिवजी; भगवान विष्णु को सौंपेंगे सृष्टि का भार
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
हिन्दू धर्म में कार्तिक मास, जो कि आठवां महीना है, बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने भगवान विष्णु लंबे समय बाद जागते हैं, इसलिए इसे धार्मिक रूप से खास समझा जाता है। वहीं, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को बैकुंठ चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।
बैकुंठ चतुर्दशी का दिन हमारे धर्म में बेहद खास है। इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इसी दिन हरि-हर की आराधना का भी बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यही वो दिन है जब भगवान शिव ने इस सृष्टि का सारा कामकाज श्री हरि नारायण को सौंप दिया था।
दरअसल, देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु पाताल लोक में शयन करते हैं और शिवजी सृष्टि का भार संभालते हैं। श्रीहरि विष्णु के जाग जाने के बाद शिवजी पुनः उन्हें सृष्टि का संचालन सौंप देते हैं।
इस साल बैकुंठ चतुर्दशी 14 नवंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन उज्जैन में हरि का हर से मिलन होगा, और भगवान महाकाल भगवान विष्णु को सृष्टि का भार सौंपेंगे।
बता दें, बैकुंठ चतुर्दशी पर रात श्री महाकालेश्वर मंदिर से भगवान महाकाल की सवारी धूमधाम से निकलेगी। यह सवारी गुदरी चौराहा और पटनी बाजार होते हुए गोपाल मंदिर पहुंचेगी। वहां रात 12 बजे हरि का हर से मिलन होगा। फिर सवारी उसी रास्ते से वापस महाकाल मंदिर लौटेगी।